करवा चौथ व्रत विधि | कथा | Karva Chauth 2017 Date

करवा चौथ व्रत की पूजा विधि

Karvachauth vrat vidhi

करवा चौथ का व्रत अब की बार 8 अक्टूबर 2017 को है। करवा चौथ का व्रत पति की लम्बी उम्र के लिए रखा जाता है। इस व्रत के करने से पति के जीवन से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन हमें शिव, पार्वती, चंद्रमा और गणेश का पूजन करना चाहिए। इस दिन सभी सुहागिन महिलायें अपने पति के लिये और कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की चाहत मेँ निर्जला उपवास रखती हैं।

करवा चौथ क्यों है चमत्कारी ?

करवा चौथ को चमत्कारी व्रत इसलिए माना जाता है कि जब पांडव वनवास गये हुए थे तो भगवान श्री कृष्ण ने अपनी सखी द्रौपदी को इस व्रत के बारे में बताया था, जिसे करने के बाद द्रौपदी को अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान मिला था।

करवा चौथ पूजा मुहर्त

  • दिन – रविवार
  • Date – 8 अक्टूबर 2017
  • पूजा मुहर्त – 5 :55 से 7 :09
  • चंद्रोदय – 8 :14

करवा चौथ के व्रत की सही विधि

  • सूर्योदय से पहले स्नान करके सास द्वारा दी गई सरगी खाएं। सरगी में मिठाई ,फल, पूड़ी और साज श्रृंगार का सामान दिया जाता है। सरगी के बाद करवाचौथ का निर्जल व्रत शुरू हो जाता है
  • दिवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें इसे करवा भरना भी कहा जाता है।
  • आठ पूरियों की अठावरी बनाये और हलवा बनाये।
  • माता गौरी को लकड़ी के सिंहासन पर विराजें और लाल रंग की चुनरी पहना कर अन्य सुहाग सामग्री सामान अर्पित करें। फिर उनके सामने जल से भरा कलश रखें।
  • गौरी और गणेश के स्वरूपों की पूजा करें इस मंतर का जाप करें ॐ नमः शिवायै शरवणे सौभाग्य संतति शुभम।
  • रात्रि के समय छननी के प्रयोग से चाँद के दर्शन करें और चन्द्रमा को अर्घ्य प्रदान करें।  फिर पति के पैरो को छुए और फिर उन्हें प्रसाद देकर उनके हाथ से खुद भी पानी पी ले।

करवा चौथ व्रत की कहानी या कथा

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व्रत के दौरान कथा सुनने की प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है। कथा सुनते समय एक तांबे के लोटे में पानी लें अब हाथ में कुछ दाने गेहूँ के लेकर कथा सुनें। और कथा सुनते समय बीच -बीच में गेहूँ के दानों को लोटे में डालते रहें।

एक नगर में साहूकार रहता था उसके सात लड़के और एक लड़की थी। कार्तिक महीने में जब कृष्ण पक्ष की चतुर्थी आयी तो साहूकार के परिवार की महिलाओ ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। जब  रात के समय साहूकार के लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने साहूकार की बेटी को भी भोजन करने के लिए कहा। ये सुनकर बहन ने अपने भाइयो को कहा कि आज मेरा उपवास है। मैं चाँद के निकलने पर पूजा विधि सम्पन्न करके ही भोजन करुँगी। भाइयो से अपनी बहन का मुर्झाया हुआ चेहरा देखा नहीं गया।

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उन्होंने घर से बाहर जाकर अग्नि जला दी उस अग्नि का प्रकाश अपनी बहन को दिखाते हुए कहने लगे कि देखो बहन चाँद निकल आया है। तुम चाँद को अर्ध्य देकर अपनी पूजा करके भोजन ग्रहण कर लो। चाँद निकलने की बात सुनकर बहन ने अपनी भाभियो से कहा कि भाभी चाँद निकल आया है चलो पूजा कर लें। उसकी भाभी अपने पतियों द्वारा की गयी युक्ति को जानती थी। उन्होंने अपनी ननद को भी इस बारे में बताया लेकिन बहन ने भाभियो की बात पर न ध्यान देते हुए पूजा संपन्न कर भोजन ग्रहण कर लिया इस प्रकार उसका व्रत टूट गया और गणेश जी उससे नाराज हो गए।

इसके तुरंत बाद उसका पति बीमार हो गया और घर का सारा धन उसकी बीमारी में खर्च हो गया। जब साहूकार की बेटी को उसके द्वारा किये गलत व्रत का पता चला तो उसे बहोत दुःख हुआ। फिर उसने पुनः पूरी विधि विधान से व्रत का पूजन किया और गणेश जी की आराधना की।

अब उसके किये हुए व्रत से गणेश जी प्रसन्न हो गए। अब गणेश जी ने उसके पति को जीवन दान किया और उसके परिवार को सम्पति प्रदान की। इस प्रकार जो भी श्रद्धा भगति से करवा चौथ व्रत को करता है वह प्रसन्नता पूर्वक अपना जीवन यापन करता है।

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